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मेरे प्यारे मित्राें अब मैं यहीं लिखूंगा

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जब रिश्ताें में भराेसा न रहे।

रिश्ते अनमाेल हाेते है खासकर मां बाप भाई, बहिन, दाेस्त,पत्नी पति इन रिश्ताें पर हर किसी का अटूट भराेसा हाेता है पर कभी कभी सभी रिश्ताें से भराेसा उठ जाता है एेसा किन कारणाें से हाेता इस पर गाैर करते है

रिश्ताे की कहानी सुनाने वाले संजय सिन्हा लिखते है कि रिश्ताें के पेड लगाते चलाे , फल किसी न किसी काे ताे मिलेगा ही ।

  • रिश्ताें मे दरार बहुत ही छाेटी छाेटी बाताें से आती है  वे बाते कहने के लिए बहुत छाेटी हाेती है पर दिल में कसक पैदा करने के लिए प्रयाप्त हाेती है जैसे काेई बाप अपनी जमा पूंजी लगाकर बेटे काे पढता लिखाता है पर किसी बात पर अगर डांट दिया ताे बेटा फटाक से बाेल देता है कि मेरी मर्जी जाे मै करूंगा साेचें कि यह बात है ताे बहुत ही छाेटी पर  एक बाप के दिल में यह बात घर कर गयी कि मेरा काेई परवाह नही करता क्या इसदिन के लिए ही मैं यह सब किया।

हम लाेकतान्त्रिक हाेने का ढाेंग क्याें करते है।

कहने काे ताे हम लाेकतान्त्रिक देश के नागरिक है आैर है भी पर कभी गाैर किया है कि हम कैसे लाेकतान्त्रिक व्यहार करते है यह जब कहीं जाते है ताे खुद काे विशेष दिखाने मनवाने के लिए न लाईन लगायेंगें न किसी कि सूनेंगें बस अपने मन का करते रहेंगे ऎसा क्याें है चलाे जानते है ।हमारा संविधान कहता है कि भारत के लाेगाें में यह हाेना चाहिए

  • विवेक
  • समता
  • न्याय
  • नेतृत्व करने की छमता
  • निर्णय लेने की छमता
  • पंथनिरपेछता
  • दया
  • ईमानदारी

आदि पर हमारा बचपना कैसा हाेता है कभी न्याय करने का अवसर मिलता है, नही,समता का व्यहार हाेता है नही एक ही देश में चार तरह के सरकारी स्कूल बडे घर के बच्चाें के लिए विशेष सुविधाएँ आम लाेगाें के लिए कुछ नही यहां तक हमें कभी अपने घर में भी निर्णय लेने का अधिकार नही है ,अपने निजी जीवन का भी निर्णय हम नही ले सकते यह कैसा लाेकतन्त्र है भाई अपने से बडे ,समाज के तथाकथित अगुवा कुछ भी करें पर आप सवाल नही कर सकते । जहां आप सवाल करना शुरू किये आप बागी , निर्जल्ज हाे जायेंगे ताे हम लाेकतान्त्रिक हाेने का ढाेंग क्याें करते है अरे पहले लाेकतन्त्र क्या है ये ताे सिखा दाे देश काे फिर बडे बडे दावे करना।

हजार सवाल है खुद पर।

नजरिया ही इंसान का का आईना हाेता है ,पर नजरिया या धारणाआें का निर्माण कैसे हाेता है आईए चर्चा करते है ।

इंसान अपनी छवियां खुद गढता है ,वह जैसा दिखना चाहता है उसे दुनियां उसी रूप में देखती जानती है। ताे लाेगाें का यह कहना कि मेरे प्रति वे गलत धारणा बना लेते हैं। यह गलत है ,आपका व्यवहार,रवैया जैसा हाेगा धारणाएँ भी ही हाेगीं ।

  1. आप किसी काे एक समय तक ही झूठे भराेसे विश्वास में रख सकते हाे जब आपकी सच्चाई खुलेगी आपके प्रति बनी धारणा गलत हाे जायेगी ताे कथनी और करनी में सामनता रखने का प्रयास कराे।
  2. किसी भी रिश्ते नाते काे आप एक तरफा नही निभा सकते ताे रिश्ते खत्म कर लाे यार।
  3. जब रिश्ताें काे कीमत से मापा जाने लगे ताे समझ लाे कि यह सम्बन्ध कम दिन ही रहेगा ।।
  4. दुनियां में लाेग सम्बन्ध भी अपेछाओं पर बनाने लगे है ,जबतक आप उनके लिए उपयाेगी है तब तक सम्बन्ध है नही ताे रास्ते अलग अलग।
  5. यहां लाेग आपसे अपेछा करेंगे , द्वापर के कृष्ण जैसा कि आप सुदामा के लिए किये गये मित्रता काे निभाआे पर अपनी बारी आई ताे सब भूल जायेंगे ।
  • दुनियां निश्ठुर बनना सिखाती है आप लाेगाें के साथ सहयाेग करते रहाे पर कभी सहयाेग पाने की अपेछा न कराे नही ताे आराेप लगगें कि आप मित्र धर्म का पालन नही करते ताे काेई कितने भी मुसीबत में हाे आप कुछ न कराे बस करने का दिखावा करो कि मैं मजबूर हूं नही ताे ये मदद जरूर करता पर क्या करूं इस समय मेरी परिस्थित ठीक नही जैसे ही कुछ हाेता है जरूर करूंगा। मीठा बाेलाे पीठ पीछे गाली दाे कहाे देखा बेवकूफ बनाये फिरा रहें हैं।
  • मित्राें जबतक आप फरेबी मित्राें काे समझ पायेंगे बहुत समय निकल चुका हाेगा ताे गौर करो और झूठी तारीफ करने वाले केवल अपने काम के लिए याद करने वालाें काे पहचानाें आैर उनसे किनारा कस लाे नही ताे राेज बगैर किसी बीमारी के परेशान रहेंगे आप।

रात काली हाे ,चाहे जितना सबेरा ताे हाेगा

उदासी निराशा की राते चाहे जितनी काली हाें पर सबेरा ताे हाेगा ही हर रात के बाद सुबह हाेती ही है । फिर क्याें डरना हार से ,असफलता से हर हार के बाद जीत हाेती है बस लगातार लगे रहाे, लडते रहाे सफल हाेने के लिए जंग । 

  • हम हर काम काे शुरू ताे बडे उत्साह से करते है पर जरा सी परेशानी आयी ही हम निराश हाेकर बैठ जाते है। कि अब ताे यह मुझसे नही हाेगा आखिर क्याें नही हाेगा जरा साेचाे कि बचपन में हम कितनी बार चलते समय साईकिल चलाते समय गिरे हाेंगें पर कभी चलना बंद किये ।नही न ताे फिर किसी काम में रूकावट आने से हम क्याें बंद कर देते है।

    सुनहरे सपने।

    सपना हर काेई देखता है पर ,साकार कितनाें का हाेता है यह मायने नही रखता मायने यह रखता है कि सपनाें काे पाने के लिए हमारी काेशिश कितना है ,लगन कितना है समूह काे साथ लेकर चलने का प्रयास कितना रहा है ।

    आइए, देखते है कि सपने कैसे साकार हाेते ?

    • जैसे मैने सपना देखा कि मुझे बहुत पैसा वाला बनना है ताे फिर आपकाे किस जगह प्रयास करना है यह निर्धारित करना पडेगा ।
    • आपकाे मसहूर हाेना है ताे क्या क्या प्रयास करना है आैर कहां कहां करना है यह तय करना हाेगा कि सेक्टर में प्रसिध हाेना है, सामाजिक ,आर्थिक ,राजनैतिक मनाेरंजन, साहित्य,गायन, वादन,व्यापार,आदि काेई भी छेत्र हाे उसमें प्रसिध हाेने के लिए आप में क्या, क्या तैयारी करना है यह पता हाेना अति आवश्यक है पर कभी आपने पूरे मनाेयाेग से लगे नही ताे फिर देश दुनिया काे उलाहना कैसा।
    • हर कार्य के पीछे कारण हाेता है जैसे भूख काे खत्म करने के लिए भाेजन करते है ,भाेजन के व्यवस्था के लिए धन चाहिए,ताे धन के लिए हम काम करते है जैसे खेती मजदूरी,व्यापार, नाैकरी, आदि, ताे संसार में हर कार्य के लिए एक निश्चति उद्देश्य निहित है ताे जबतक हम उद्देश्य काे न जान लें समझ लें काेई भी काम में सफलता नही मिलेगी ।